“कोई झगड़ा तो न था कोई गिला भी नहीं,

“कोई झगड़ा तो न था कोई गिला भी नहीं,
वो इसी शहर में था लेकिन मिला भी नहीं..

किस रंग में ढलता है ये चेहरा शाम का,
हवाएं चलीं थी लेकिन पत्ता हिला भी नहीं ।

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