“एक मासूम से इंसान को खिलौना न बना,

“एक मासूम से इंसान को खिलौना न बना,
मुझे सिर्फ़ वक़्त काटने के लिए अपना ना बना..

आज गिर गया तो क्या तेरे घर का शजर था,
एकदम से मुझ को तोड़ कर तिनका ना बना...

ज़रूरी तो नहीं हर बात तेरे हक़ में कहे वो,
बहुत बोलने वाले को हर दफ़ा अपना ना बना..

तेरा छोड़ के जाना एक घाव कर गया मुझमें,
पलट कर देख के इन ज़ख्मो को गहरा ना बना ।

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