“कुछ बात हम न कह पाएं तो बेहतर,
एक दूजे को याद भी न आएं तो बेहतर..
एक पहर और गुज़र गई रोज़ की तरह,
हम दोनों अगर यहीं रह जाएं तो बेहतर..
राह आपको देख कर मिलता है सुकून,
ख़ैर, आप घर मिलने आएं तो बेहतर..
कुछ पलों के लिए होंठो पे मुस्कान आती है,
उम्र भर के लिए यहीं ठहर जाये तो बेहतर।
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