“पंछी सर्दियों में जब घर के पास आने लगते हैं,
“पंछी सर्दियों में जब घर के पास आने लगते हैं,
पिछले बरस साथ थे, वो लोग याद आने लगते है..
हर रोज़ रूठ जाती है किसी बहाने से ये ज़िन्दगी,
थके हारे घर को आके हम इसे मनाने लगते है..
तेरी यादों के रस्ते पे सफर कुछ यूं चलता रहता है,
पहले खुद को उठाते है फिर खुद ही को गिराने लगते है ।
पिछले बरस साथ थे, वो लोग याद आने लगते है..
हर रोज़ रूठ जाती है किसी बहाने से ये ज़िन्दगी,
थके हारे घर को आके हम इसे मनाने लगते है..
तेरी यादों के रस्ते पे सफर कुछ यूं चलता रहता है,
पहले खुद को उठाते है फिर खुद ही को गिराने लगते है ।
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