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Showing posts from February, 2019

“एक मासूम से इंसान को खिलौना न बना,

“इस कांच को जिसने तोड़ा वो पत्थर संभाल रखा है,

“पंछी सर्दियों में जब घर के पास आने लगते हैं,

“होती क्या है इश्क़ फ़कीरी कोई हमें बतलाये क्यों,

“दिन जो ठहरे से लगते है गुज़र जायेंगे,

“कुछ रिवायतों का मुझपे असर न हो सका,

“तुम क्यों रौशनी से घबराए लगते हो,

“घर से निकला है आज नक़्शे के बिना कोई,

“बिछड़ने की बात से वो डरता भी था,

“कोई झगड़ा तो न था कोई गिला भी नहीं,

“परेशान नहीं हूँ मैं,

“कुछ बात हम न कह पाएं तो बेहतर,

“माना कि इत्तेफाक़ से आज तुम मेरे साथ हो,