“मालूम पड़ता था रास्ता है कोई,
“मालूम पड़ता था रास्ता है कोई,
मुझे धुएं में खड़ा दिखता है कोई
हालांकि हंस के मिला था तुमसे,
घर में रात को सिसकता है कोई
ये जिस अदा से नज़र चुराई तूने,
क्या तुझसे रहा मेरा वास्ता है कोई”
मुझे धुएं में खड़ा दिखता है कोई
हालांकि हंस के मिला था तुमसे,
घर में रात को सिसकता है कोई
ये जिस अदा से नज़र चुराई तूने,
क्या तुझसे रहा मेरा वास्ता है कोई”
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