“एक चादर है जो मुझसे ओढ़ी जाती नहीं,

“एक चादर है जो मुझसे ओढ़ी जाती नहीं,
इक जाने क्यों नींद रात भर आती नहीं

कई जवाब जो ढूंढने को है बाकी,
इक बात है जो मुझसे कही जाती नहीं

है इक उम्र जो हिज्र में आधी हो गई,
इक रात है जो मुझसे काटी जाती नहीं

यूं तो नहीं है कुछ बयां करने को बाकी,
इक ख़ामोशी है जो तुमसे समझी जाती नहीं

इस रात मुझसे जाना है कहीं दूर को चलके,
इक चौखट है जो मुझसे लांघी जाती नहीं”

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