“दोष दे रहे हो तुम मेरी नादानी को,

“दोष दे रहे हो तुम मेरी नादानी को,
तुमने समझा ही नहीं मेरी परेशानी को

मेरे अंदर गहराई तक उतरते क्यों नहीं,
खारा क्यों समझते हो इस दरिया के पानी को

एक तेरा किरदार है जिससे जान बाकी है अभी,
तेरा ज़िक्र गर ना हो कोई सुनता नहीं मेरी कहानी को

मुझ पे भी अब धूल जमने लगी है वक़्त की,
जैसे कोई रख के भूल गया हो क़िताब पुरानी को”

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