“तेरे चले जाने से मैं क्यों उदास नहीं,

“तेरे चले जाने से मैं क्यों उदास नहीं,
क्या ये सुकून है कि तू अब पास नहीं

बहुत क़रीब से गुज़रा हूँ एक दरिया के मैं,
दिल ने कह दिया कि ये वो प्यास नहीं

तेरे इंतेज़ार में रोना बड़ी बात तो नहीं,
तेरे वापस आने की भी तो कोई आस नहीं

अंजान बीमारी की दवा खाता हूं आजकल,
इश्क़ का बोलते है सब कि कोई इलाज नहीं

मुझे जिस तरह से तूने पुकारा मैं जान गया,
तू बदल गया है ये पहले वाला मिजाज़ नहीं”

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